संदेश

नवंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत की प्रमुख जनजातियाँ और उनकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत ( Major Tribes of India in Hindi)

आज का भारत आधुनिकता की दौड़ में कितनी भी आगे निकल चुका हो, लेकिन इसकी असली आत्मा इसकी विविध संस्कृतियों में बसती है। भारत की इस सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में यहाँ के जनजातीय (Tribal) समुदायों का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय संविधान के अनुसार, इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes - ST) कहा जाता है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन जनजातियों का है, जिनकी अपनी अनूठी भाषा, जीवनशैली, कला और परंपराएं हैं। आइए आज के इस लेख में हम भारत की कुछ प्रमुख जनजातियों और उनके गौरवशाली इतिहास को करीब से जानते हैं। 1. भील जनजाति (Bhil Tribe) – वीरता और कला का प्रतीक भील भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है। 'भील' शब्द की उत्पत्ति 'बिल्लु' से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'धनुष'। ये लोग तीरंदाजी में बेहद कुशल होते हैं। इतिहास और योगदान : भील राजाओं का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। महाराणा प्रताप की सेना में भील योद्धाओं ने अकबर के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। संस्कृति...

जिला छतरपुर के किले एवं गढियां

चित्र
 जिला छतरपुर के किले एवं गढि़यां  छतरपुर, पन्‍ना - झांसी मार्ग पर स्थित है। यहां से खजुराहो, महोबा, टीकमगढ, हरपालपुर पहुंचा जा सकता है। समीपस्‍थ मध्‍य रेलवे की झांसी - मानिकपुर व छतरपुर - ललितपुर - भोपाल शाखा का रेलवे स्‍टेशन है। इस नगर का संबंध महाराजा छत्रशाल से जुडा हुआ है। महाराजा छत्रशाल ने इस जंगली क्षेत्र को अपनी कर्मठता से अभिसिंचित करकेे मउ सहानियां के पास एक नयागांव, अपनी पुरानी जागीर महेवा - नुना के नाम पर महेवा बसाकर किला और अपना रनवास बनाया था। फिर सुरक्षा की दृष्टि से पन्‍ना को राजधानी बनाया। इस जिले में जितने भी किले थे प्राय: छत्रशाल के वंशजों के ही थे। सिंदुरखी, बसारी, इमिलिया, बिक्रमपुर, मरकारी, ललपुर, टटम, बर्रोही, पहरा, बिलहरी ''  इन सभी रियासतों के जागीरदार क्रमश: लल्‍ला पहाड सिंह, रानी नन्‍हीं दुलैया, दीवान कीरत सिंह, दीवान अमान सिंह, राव बैंकटराव, दीवान उमराव सिंह, दीवान मानसिंह एवं बिलहरी के माफीदार दीक्षित माधवराम थे। इन सभी जागीरदारोंं की गढीं थीं।  आलीपुरा:- यह झांसी - छतरपुर सड़क मार्ग पर स्थित है। इसका निकटतम रेलवे स्‍टेशन हरपा...

मध्यप्रदेश का इतिहास

चित्र
मध्यप्रदेश का इतिहास गुप्त वंश मगध जनपद बौध्द काल तथा उत्तर भारत का सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद था। मगध देश में वैभवहीन छोटे −मोटे राजा ही रह गये थे। इनमें से एक राजा चन्द्रगुप्त प्रथम का विवाह नेपाल के लिच्छवि वंश में हो गया था। लिच्छवि वंश में विवाह हो जाने से, उनका गौरव बहुत बढ़ गया, क्याेंकि वह वंश बहुत प्राचीन , प्रतापी और प्रभावशाली था। लिच्छवियों से उसे प्राचीन वैभवशाली राजधानी पाटलिपुत्र प्राप्त हो ग ई। तब तो चंद्रगुप्त प्रथम ने अवसर पाकर अपना महत्व इतना बढ़ाया की शीघ्र  ही उसने अपने आपको महाराजाधिराज के  विरूध्द घोषित कर दिया और गुप्त नामक वंश का प्रचार सन् 320  ई में कर दिया। एरणः− एरण जो  कि मध्यप्रदेश के सागर  जिले में विदिशा के निकट बेतवा नदी के  किनारे स्थित है। वहां से एक अभिलेख प्राप्त हुआ है, जो 510  ई का है। इसे भानुगुप्त का अभिलेख कहते हैं।   स्वभोग नगर एरणः−      चंद्रगुप्त प्रथम का पुत्र समुद्रगुप्त हुआ,  जिसने अपने पिता की तरह अपने राज्य को चहुंओर फैलाने का प्रसार किया और अनेक राजाओं को परास्त कर उन्हें मांड...