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जनजातीय परंपरायें

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  जनजातीय परंपरायें जनजातीय परंपराओं की एक बहुत बडी श्रेणी   है किंतु उन सभी के उद्गम का इतिहास ज्ञात नहीं है। उदाहरण के लिए भीलों की पिठौरा चित्रण परंपरा और शैलाश्रय चित्रण के बीच की कडियॉं उपलब्‍ध नहीं हैं। इसी तरह जनजातियॉं अनेक वाद्ययंत्रों का प्रयोग करती हैं किन्‍तु इन यंत्रों का कब से उपयोग प्रारंभ हुआ यह सब ज्ञात नहीं है। 1.       धार्मिक परंपरायें और शिल्‍प विधान का विकास 2.       जनजातीय निषेध 3.       बैगा: जनजातीय   चिकित्‍सक एवं जादूगर 4.       नृत्‍य , गीत , संगीत 5.       घोटुल   उपर्युक्‍त पॉंचों वर्ग की परंपराये एक दूसरे से भिन्‍न हैं , कहीं व्‍यक्ति प्रमुख है , कहीं संस्‍था , कहीं आस्‍था तो कहीं स्‍वानुभूति –   1.       धा र्मिक परंपरायें और शिल्‍प विधान का विकास जनजातीय देवताओं के मूर्तिशिल्‍प , मंदिर शिल्‍प या देवस्‍थान शिल्‍प एवं देवताओं को अर्पण करने संबंधी ( या बलि शिल्‍प) शिल्‍प की झॉकी हमं जनजातीय धार्मिक परंपराओं में देखने को मिलती हैं , यहॉं पर कुछ उदाहरण प्रस्‍तुत हैं- पर्व के देवी देवता                         वैरियर एल्विन ठाकुर

KHUDA HAAFIZ 2 AGNI PARIKSHA REVIEW

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KHUDA HAAFIZ 2 AGNI PARIKSHA REVIEW  फारूक   कबीर   की   फिल्‍म क्‍या खास है   आइये   जानते हैं – बाप के बदले की कहानी है फिल्‍म खुदा हाफिज 2 अग्‍नि परीक्षा । इस फिल्‍म में एक्‍शन के साथ – साथ इमोशंस भी जुडे हैं ।                                       फिल्‍म – खुदा हाफिज 2 अग्‍नि परीक्षा  रेटिंग – 3 स्‍टार कलाकार – विद्युत जामवाल , शिवालिका ओबेरॉय , राजेश तेलंग , शीबा चढडा ,   बोधीसत्‍व शर्मा । निर्देशक -   फारूक कबीर फारूक  कबीर की फिल्‍म खुदा हाफिज  2 अग्‍नि परीक्षा से पहले खुदा हाफिज में कमाल करने के बाद एक्‍टर विद्युत जामवाल की धमाकेदार वापसी हुई है।   खुदा हाफिज में ह्यूमन ट्रैफिकिंग   तो दिखाया गया था तो वहीं फिल्‍म खुदा हाफिज 2 अग्‍नि परीक्षा में विद्युत जामवाल (समीर) और शिवालिका ओबेरॉय (नरगिस)   दोनों की आगे की जिंदगी को दिखाया गया है । कहानी में नरगिस अपने साथ हुये हादसे से आज भी लडती है । वहीं दूसरी तरफ समीर (विद्युत जामवाल) उनका पूरा साथ देने की कोशिश करते हैं। पर दोनों का रिश्‍ता पूरी तरह से बिखर गया है , इस बिखरे हुये रिश्‍ते को समेटने का काम करती है

IPL 2022

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IPL 2022 Time Table आईपीएल का 15वां सीजन, जिसे आईपीएल 2022 कहा गया  है ।  महाराष्ट्र में 26 मार्च 2022 से मुंबई में 55 और पुणे में 15 मैचों के साथ शुरू हो गया है।  प्रमुख स्टेडियम  1 वानखेडे स्टेडियम  में होने वाले मैचों की संख्‍या -  20 2 ब्रेबोर्न स्टेडियम में होने वाले मैचों की संख्‍या  - 15 3 डीवाई पाटिल स्टेडियम में  - 20  4  महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) पुणे मैदान में  - 15    आईपीएल 2022 का फाइनल मैच 29 मई 2022 को अहमदाबाद, गुजरात में खेला जाएगा।  प्रायोजन कारणों से, इस सीजन को टाटा आईपीएल 2022 के रूप में जाना जाएगा। प्रमुख तथ्‍य :-  आईपीएल 2022 में इस बार 70 लीग मैच होंगे,  जिसमें दो नई टीमें लखनऊ सुपर जायंट्स और गुजरात टाइटन्स शामिल होंगी।  इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी सीज़न का लीग चरण मुंबई और पुणे में चार स्थानों पर खेला जाएगा, जिसका फाइनल 29 मई 2022 को अहमदाबाद गुजरात में होगा।  आईपीएल 2022 शेड्यूल आईपीएल 2022 में 60 दिनों के दौरान 74 मैचों में प्रतिस्पर्धा करने वाली 10 टीमें शामिल होंगी।  इंडियन प्रीमियर लीग के मौजूदा विजेता चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) हैं, जबकि आ

मेरी कहानी

 एक पल के लिए भूल जाओ, कि तुम कौन हो। सबसे जरूरी बात अपनी पहचान को पीछे छोडते हुए खुद को हर ख्‍याल से खाली कर लो। और थोडी देर के लिए सिर्फ 'मुझे' जी लो। 'मुझे जिंदगी से कभी कुछ नहीं चाहिए था'।  अगर मैं यह सोचता हूं, तो वो भी झूठ होगा। दरअसल वो मेरी जिंदगी का सबसे बडा झूठ होगा। मेरी हमेशा से खूब सारी इच्‍छाएं रहीं हैं। हां, यह अलग बात है कि मुझे अक्‍सर इन इच्‍छाओं को जाहिर करने के लिए शब्‍द नहीं मिल पाते । कभी मेरी आवाज धोखा दे देती, तो कभी मेरा दिल भारी हो जाता।  लेकिन,  जिंदगी में आखिर मैं  चाहता क्‍या हूं .  मैं आज  भी नहीं जानता। इसलिए, मझे जो चाहिए था और जिसकी मैं आज भी ख्‍वाहिश रखता हूं, उसके बारे में आज सब बताउंगा।  आज, मैं  सच कहूंगा: तुमसे और उससे भी ज्‍यादा जरूरी , खुद से।  मैं........मैं.......  मैं जीना चाहता हूं। हां। मुझे एक ही जिंदगी में कई जिंदगी जीनी है।  मैं अपने बारे में लिखना चाहता हूं और हर उस इंसान के बारे में लिखना चाहता हूं जिससे मैं कभी मिला हूं।  उस जिंदगी का सार लिख देना चाहता हूं जिसे वास्‍तव में 'जीना' कहते हैं। उन तमाम  खुशनुमा  और द

बुन्‍देलखण्‍ड के दुर्ग ( MP Ke Durg)

  बुन्‍देलखण्‍ड के दुर्ग :- कालिंजर का दुर्ग अजयगढ का दुर्ग  रसिन का दुर्ग मडफा  का दुर्ग शेरपुर सेवडा का दुर्ग रनगढ का दुर्ग तरहुआ का दुर्ग भूरागढ का दुर्ग कल्‍याणगढ का दुर्ग महोबा का दुर्ग सिरसागढ का दुर्ग जैतपुर का दुर्ग मंगलगढ का दुर्ग मनियागढ का दुर्ग बरूआसागर का दुर्ग ओरछा का दुर्ग झाँँसी का दुर्ग गढकुढार का दुर्ग चिरगांव का दुर्ग एरच का दुर्ग उरई का दुर्ग कालपी का दुर्ग दतिया का दुर्ग ग्‍वालियर का दुर्ग चन्‍देरी का दुर्ग बढौनी का दुर्ग सिंगौरगढ का दुर्ग पन्‍ना का दुर्ग छतरपुर का दुर्ग राजनगर का दुर्ग बटियागढ का दुर्ग बिजावर का दुर्ग या जटाशंकर का दुर्ग बीरगढ का दुर्ग धमौनी का दुर्ग पथरीगढ का दुर्ग बारीगढ का दुर्ग गौरीहार का दुर्ग कदौरा का दुर्ग कुलपहाड का दुर्ग तालबेहट का दुर्ग देवगढ का दुर्ग ।

संत सिंगा जी महाराज

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संत सिंगाजी मंदिर:-  संत सिंगाजी समाधि स्‍थल  संत सिंगा जी का परिचय:- निमाड के प्रसिध्‍द संत  सिंगा जी का जन्‍म म.प्र. के बडवानी जिले के खजूरी गांव एक गवली परिवार में हुआ था । इनके पिता जी का नाम श्री भीमा जी गवली और माता जी का नाम गवराबाई था। इनके तीन संतान थी जिसमें बडे भाई का नाम श्री लिम्‍बाजी और बहिन का नाम किसनाबाई था।  संत सिंगा जी की चार संताने थी जो क्रमश: है  - श्री कालू जी, श्री भोलू जी, श्री सदू जी और श्री दीप जी। सदियों से चली आ रही हमारी आध्‍यात्‍मिक मान्‍यताओं और उसके परिणामों से इन संतो का गहरा नाता रहा है। समाज में नैतिक मूल्‍यों और आदर्शों की स्‍थापना के लिए काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह के लिए परित्‍याग,आहार- विहार पर संयम से व्‍यवहार करने पर बल दिया है ।  शब्‍द के पार सामरथ संत सिंगाजी महाराज:- ज्ञान की नौबत बाजे, संत सिंगाजी गाजे। ब्रह्मगिर को हुआ अचरज, कहो कौम हुआ सामरथ।। निमाड की संत परम्‍परा में संत सिंगाजी का स्‍थान सबसे उपर है। वे एक संत ही नहीं कवि-मनीषी भी थे। उनके साधना पथ में हुए अनुभवों को अपनी काव्‍यभाषा में कहना भी जानते थे। कहते हैं कि उन्‍होनें ग्‍यारह

बुन्‍देलखण्‍ड का पहला परमार शासक और उसका कार्यकाल

पुन्‍यपाल परमार और बुन्‍देलखण्‍ड    पुन्‍यपाल परमार का नाम पवाया के शासक के रूप में बुन्‍देलखण्‍ड के इतिहास में तेरहवीं सदी के मध्‍य में मिलता है। कहीं-कहीं पुन्‍यपाल परमार को 'प्रनपाल परमार' भी लिखा गया है। यह पवाया प्राचीन इतिहास की सुप्रसिध्‍द नगरी पदमावती है। यहां प्रथम शताब्‍दी से चौथी शताब्‍दी तक नागों का राज्‍य रहा था। पदमावती के संबंध में प्राचीनतम उल्‍लेख विष्‍णुपुराण में भी मिलता  है। सातवीं सदी की कृति बाणभट्ट के हर्षचरित में भी पदमावती का उल्‍लेख मिलता है।                                                            इसी क्रम में संस्कृत कवि - नाटककार भवभूति ने अपने नाटक ' मालती माधव' में भी इस नगर के गौरव का उल्‍लेख किया है। ग्‍यारहवीं सदी की कृति 'सरस्‍वती कंठाभरण' परमार राजा 'भोज कृत' में भी पदमावती का उल्‍लेख आया है, यहां कभी विश्‍वविद्यालय भी था। और देशक के सुदूर भागों से यहां विद्वान एवं छात्र अपनी ज्ञान पिपासा शांत करने हेतु आते थे। यह स्‍‍थान वर्तमान में ग्‍वालियर जिले के भितरवार तहसील से पूर्व की ओर दस-बारह किलोमीटर दूर सिंध और पारवती क