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भारत की प्रमुख जनजातियाँ और उनकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत ( Major Tribes of India in Hindi)

आज का भारत आधुनिकता की दौड़ में कितनी भी आगे निकल चुका हो, लेकिन इसकी असली आत्मा इसकी विविध संस्कृतियों में बसती है। भारत की इस सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में यहाँ के जनजातीय (Tribal) समुदायों का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय संविधान के अनुसार, इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes - ST) कहा जाता है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन जनजातियों का है, जिनकी अपनी अनूठी भाषा, जीवनशैली, कला और परंपराएं हैं। आइए आज के इस लेख में हम भारत की कुछ प्रमुख जनजातियों और उनके गौरवशाली इतिहास को करीब से जानते हैं। 1. भील जनजाति (Bhil Tribe) – वीरता और कला का प्रतीक भील भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है। 'भील' शब्द की उत्पत्ति 'बिल्लु' से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'धनुष'। ये लोग तीरंदाजी में बेहद कुशल होते हैं। इतिहास और योगदान : भील राजाओं का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। महाराणा प्रताप की सेना में भील योद्धाओं ने अकबर के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। संस्कृति...

बुन्‍देलखण्‍ड का पहला परमार शासक और उसका कार्यकाल

पुन्‍यपाल परमार और बुन्‍देलखण्‍ड    पुन्‍यपाल परमार का नाम पवाया के शासक के रूप में बुन्‍देलखण्‍ड के इतिहास में तेरहवीं सदी के मध्‍य में मिलता है। कहीं-कहीं पुन्‍यपाल परमार को 'प्रनपाल परमार' भी लिखा गया है। यह पवाया प्राचीन इतिहास की सुप्रसिध्‍द नगरी पदमावती है। यहां प्रथम शताब्‍दी से चौथी शताब्‍दी तक नागों का राज्‍य रहा था। पदमावती के संबंध में प्राचीनतम उल्‍लेख विष्‍णुपुराण में भी मिलता  है। सातवीं सदी की कृति बाणभट्ट के हर्षचरित में भी पदमावती का उल्‍लेख मिलता है।                                                            इसी क्रम में संस्कृत कवि - नाटककार भवभूति ने अपने नाटक ' मालती माधव' में भी इस नगर के गौरव का उल्‍लेख किया है। ग्‍यारहवीं सदी की कृति 'सरस्‍वती कंठाभरण' परमार राजा 'भोज कृत' में भी पदमावती का उल्‍लेख आया है, यहां कभी विश्‍वविद्यालय भी था। और देशक के सुदूर भागों से यहां विद्वान एवं छात्र अपनी ज्ञान पिपास...