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भारत की प्रमुख जनजातियाँ और उनकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत ( Major Tribes of India in Hindi)

आज का भारत आधुनिकता की दौड़ में कितनी भी आगे निकल चुका हो, लेकिन इसकी असली आत्मा इसकी विविध संस्कृतियों में बसती है। भारत की इस सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में यहाँ के जनजातीय (Tribal) समुदायों का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय संविधान के अनुसार, इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes - ST) कहा जाता है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन जनजातियों का है, जिनकी अपनी अनूठी भाषा, जीवनशैली, कला और परंपराएं हैं। आइए आज के इस लेख में हम भारत की कुछ प्रमुख जनजातियों और उनके गौरवशाली इतिहास को करीब से जानते हैं। 1. भील जनजाति (Bhil Tribe) – वीरता और कला का प्रतीक भील भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है। 'भील' शब्द की उत्पत्ति 'बिल्लु' से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'धनुष'। ये लोग तीरंदाजी में बेहद कुशल होते हैं। इतिहास और योगदान : भील राजाओं का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। महाराणा प्रताप की सेना में भील योद्धाओं ने अकबर के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। संस्कृति...

चेला तुंबी भरके लाना

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 चेला तुंबी  भरके लानाः− प्राचीन गुरु परंपरा का ये प्रचलित गीत ... कहता बहुत कुछ ..  जानिये क्या है ये सीख..... चेला भिक्षा लेके आना गुरु ने मंगाई, 1. पहली भिक्षा  जल की लाना......कुआँ बावड़ी छोड़ के लाना, नदी नाले के पास न जाना  तुंबी भरके लाना। 2. दूजी भिक्षा  अन्न की लाना  गाँव नगर के पास न जाना, खेत खलिहान को छोड़के लाना, लाना तुंबी भरके  लाना , तेरे गुरु ने मंगाई है। 3. तीजी भिक्षा  लकड़ी लाना... डांग-पहाड़ के पास न जाना, गीली सूखी छोड़ के लाना-लाना गठरी बनाके लाना। तेरे गुरु ने मंगाई । 4. चौथी भिक्षा  मांस की लाना... जीव जंतु के पास न जाना,, जिंदा मुर्दा छोड़ के लाना...लाना हंडी भरके लाना  तेरे गुरु ने मंगाई.....चेला तुंबी भरके लाना.... कुछ वर्ष पहले गाँव के लोगों से बिल्कुल देशी धुन में एक गीत सुना रात को।गुरु चेले की परीक्षा ले रहे हैं। चार चीजें मंगा रहे हैं : जल, अन्न,लकड़ी, मांस। लेकिन शर्तें भी लगा दी हैं।अब देखना ये है कि चेला लेकर आता है या नहीं, इसी परीक्षा पर उसकी परख होनी है। जल लाना है, लेकिन बारिश का भी न हो, कुएं बा...

CHHATARPUR KI RANI MAJHALI SARKAR (मझली सरकार)

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QUEEN OF CHHATARPUR छतरपुर के परमार शासक की दूसरी रानी यानि मझली सरकार का नाम झडकुँआरी था।  ये झींझन क्रांतिकारी देेशपत बुन्‍देला के परिवार की थीं। यह झींझन गांव छतरपुर जिले में नौगांव तहसील के अंतर्गत आता है। प्रतापसिंह परमार की चार रानियों में से उत्‍तराधिकारी के रूप में कोई पुत्र उत्‍पन्न नहीं हुआ था। अत: प्रतापसिंह की मई 1854 ई0 में मृत्‍यु के बाद उनके ही परिवार के आठ साल के बालक जगतराज को छतरपुर का उत्‍तराधिकारी मानकर मझली सरकार को कुछ समय के लिए रीजेंट संरक्षक बनाया गया था। परोक्ष रूप में संरक्षिका की भूमिका में झडकुॅआरी की सत्‍ता थी। इसके बीच 1857 का स्‍वतंत्रता संग्राम भी हुआ और मझली सरकार का भतीजा देशपत बुन्‍देला छतरपुर के क्षेत्रों में सक्रिय क्रांतिकारी था। रानी की यह गोपनीय नीति थी कि वे अपने विश्‍वस्‍त सैनिक  और सहयोगियों के माध्‍यम से देशपत बुन्‍देला को रस्‍द, आश्रय और अन्‍य सुविधाएं प्रदान करती थीं। इस कारण मझली सरकार से छतरपुर के राजा जगतराज से नहीं पटती थी और वे  जगतराज से छिपकर, देशपत बुन्‍देला का समर्थन करती थीं क्‍योंकि देशपत बुन्‍देला मझली सरकार का भत...