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भारत की प्रमुख जनजातियाँ और उनकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत ( Major Tribes of India in Hindi)

आज का भारत आधुनिकता की दौड़ में कितनी भी आगे निकल चुका हो, लेकिन इसकी असली आत्मा इसकी विविध संस्कृतियों में बसती है। भारत की इस सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में यहाँ के जनजातीय (Tribal) समुदायों का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय संविधान के अनुसार, इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribes - ST) कहा जाता है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन जनजातियों का है, जिनकी अपनी अनूठी भाषा, जीवनशैली, कला और परंपराएं हैं। आइए आज के इस लेख में हम भारत की कुछ प्रमुख जनजातियों और उनके गौरवशाली इतिहास को करीब से जानते हैं। 1. भील जनजाति (Bhil Tribe) – वीरता और कला का प्रतीक भील भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है, जो मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है। 'भील' शब्द की उत्पत्ति 'बिल्लु' से हुई है, जिसका अर्थ होता है 'धनुष'। ये लोग तीरंदाजी में बेहद कुशल होते हैं। इतिहास और योगदान : भील राजाओं का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। महाराणा प्रताप की सेना में भील योद्धाओं ने अकबर के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। संस्कृति...

भील जनजाति

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                            भील जनजाति                                  भील जनजाति पश्चिम मध्‍यप्रदेश के झाबुआ, गुजरात और राजस्‍थान में देश की एक बडी जनजाति है। भीलों की चारों उपशाखाओं भिलाला, बारेला, पटलिया और राठ में गुदने का चलन है। पुरूष आंख की कोर के समीप , ठुड्डी, हाथ पर गुदने लिखाते हैं। भीली महिलाओं के गुदने दूसरी वन्‍य जातियों से सर्वथा भिन्‍न रूपाकरों में प्रचलित है। त्‍वचा के काले रंग में गोदने छिप जाते हैं। गौरवर्ण गुदना के लिए सबसे अच्‍छा कैनवास होता है। गौरवर्ण पर गुदने फूलों के समान खिलते हैं। भील की उपशाखाओं की महिलाओं का प्राय: गौरवर्ण होता है। त्‍वचा का रंग गोरा होने के कारण उन पर हरित नील वर्णी गुदने खूब फबते हैं। भीलों की जितनी सुंदर वेशभूषा और गहने होते हैं, उतने ही सुंंदर उनके गुदने होते हैं। साज- सज्‍जा के मामले में भील- भिलाला संसार की सबसे रंगीन जनजाति है। स्‍त्री और पुरूष दोनों समानरूप से कपडों , गहनों और गुद...